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सहीह बुख़ारी

नंबर 1012

नंबर 1012किताब 15, नंबर 7
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، قَالَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ أَبِي بَكْرٍ أَنَّهُ سَمِعَ عَبَّادَ بْنَ تَمِيمٍ، يُحَدِّثُ أَبَاهُ عَنْ عَمِّهِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ زَيْدٍ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم خَرَجَ إِلَى الْمُصَلَّى فَاسْتَسْقَى، فَاسْتَقْبَلَ الْقِبْلَةَ، وَقَلَبَ رِدَاءَهُ، وَصَلَّى رَكْعَتَيْنِ‏.‏ قَالَ أَبُو عَبْدِ اللَّهِ كَانَ ابْنُ عُيَيْنَةَ يَقُولُ هُوَ صَاحِبُ الأَذَانِ، وَلَكِنَّهُ وَهْمٌ، لأَنَّ هَذَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ زَيْدِ بْنِ عَاصِمٍ الْمَازِنِيُّ، مَازِنُ الأَنْصَارِ‏.‏
Narrated `Abdullah bin Zaid:The Prophet (ﷺ) went towards the Musalla and invoked Allah for rain. He faced the Qibla and wore his cloak inside out, and offered two rak`at

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · Invoking Allah for Rain (Istisqaa)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।