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सहीह बुख़ारी

नंबर 1010

नंबर 1010किताब 15, नंबर 5
حَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ مُحَمَّدٍ، قَالَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ الأَنْصَارِيُّ، قَالَ حَدَّثَنِي أَبِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ الْمُثَنَّى، عَنْ ثُمَامَةَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَنَسٍ، عَنْ أَنَسٍ، أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ ـ رضى الله عنه ـ كَانَ إِذَا قَحَطُوا اسْتَسْقَى بِالْعَبَّاسِ بْنِ عَبْدِ الْمُطَّلِبِ فَقَالَ اللَّهُمَّ إِنَّا كُنَّا نَتَوَسَّلُ إِلَيْكَ بِنَبِيِّنَا فَتَسْقِينَا وَإِنَّا نَتَوَسَّلُ إِلَيْكَ بِعَمِّ نَبِيِّنَا فَاسْقِنَا‏.‏ قَالَ فَيُسْقَوْنَ‏.‏
Narrated Anas:Whenever drought threatened them, `Umar bin Al-Khattab, used to ask Al-Abbas bin `Abdul Muttalib to invoke Allah for rain. He used to say, "O Allah! We used to ask our Prophet to invoke You for rain, and You would bless us with rain, and now we ask his uncle to invoke You for rain. O Allah ! Bless us with rain."(1) And so it would rain

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · Invoking Allah for Rain (Istisqaa)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।