حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى، قَالَ حَدَّثَنَا هِشَامٌ، قَالَ حَدَّثَنِي أَبِي، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ كَانَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم يُصَلِّي، وَأَنَا رَاقِدَةٌ مُعْتَرِضَةً عَلَى فِرَاشِهِ، فَإِذَا أَرَادَ أَنْ يُوتِرَ أَيْقَظَنِي فَأَوْتَرْتُ.
Narrated `A'isha:The Prophet (ﷺ) used to offer his night prayer while I was sleeping across in his bed. Whenever he intended to offer the witr prayer, he used to wake me up and I would offer the witr prayer too
स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।