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सहीह बुख़ारी

नंबर 990

नंबर 990किताब 14, नंबर 1
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ يُوسُفَ، قَالَ أَخْبَرَنَا مَالِكٌ، عَنْ نَافِعٍ، وَعَبْدِ اللَّهِ بْنِ دِينَارٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، أَنَّ رَجُلاً، سَأَلَ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم عَنْ صَلاَةِ اللَّيْلِ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ صَلاَةُ اللَّيْلِ مَثْنَى مَثْنَى، فَإِذَا خَشِيَ أَحَدُكُمُ الصُّبْحَ صَلَّى رَكْعَةً وَاحِدَةً، تُوتِرُ لَهُ مَا قَدْ صَلَّى ‏"‏‏.‏
Narrated Ibn `Umar: Once a person asked Allah's Messenger (ﷺ) about the night prayer. Allah's Apostle (ﷺ) replied, "The night prayer is offered as two Rak`at followed by two Rak`at and so on and if anyone is afraid of the approaching dawn (Fajr prayer) he should pray one Rak`ah and this will be a Witr for all the Rak`at which he has prayed before

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 14 · Witr Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।