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सहीह बुख़ारी

नंबर 986

नंबर 986किताब 13, नंबर 35
حَدَّثَنَا مُحَمَّدٌ، قَالَ أَخْبَرَنَا أَبُو تُمَيْلَةَ، يَحْيَى بْنُ وَاضِحٍ عَنْ فُلَيْحِ بْنِ سُلَيْمَانَ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْحَارِثِ، عَنْ جَابِرٍ، قَالَ كَانَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم إِذَا كَانَ يَوْمُ عِيدٍ خَالَفَ الطَّرِيقَ‏.‏ تَابَعَهُ يُونُسُ بْنُ مُحَمَّدٍ عَنْ فُلَيْحٍ‏.‏ وَحَدِيثُ جَابِرٍ أَصَحُّ‏.‏
Narrated Jabir bin `Abdullah:On the Day of `Id the Prophet (ﷺ) used to return (after offering the `Id prayer) through a way different from that by which he went

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 13 · The Two Festivals (Eids)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।