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सहीह बुख़ारी

नंबर 951

नंबर 951किताब 13, नंबर 3
حَدَّثَنَا حَجَّاجٌ، قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، قَالَ أَخْبَرَنِي زُبَيْدٌ، قَالَ سَمِعْتُ الشَّعْبِيَّ، عَنِ الْبَرَاءِ، قَالَ سَمِعْتُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم يَخْطُبُ فَقَالَ ‏ "‏ إِنَّ أَوَّلَ مَا نَبْدَأُ مِنْ يَوْمِنَا هَذَا أَنْ نُصَلِّيَ، ثُمَّ نَرْجِعَ فَنَنْحَرَ، فَمَنْ فَعَلَ فَقَدْ أَصَابَ سُنَّتَنَا ‏"‏‏.‏
Narrated Al-Bara':I heard the Prophet (ﷺ) delivering a Khutba saying, "The first thing to be done on this day (first day of `Id ul Adha) is to pray; and after returning from the prayer we slaughter our sacrifices (in the name of Allah) and whoever does so, he acted according to our Sunna (traditions)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 13 · The Two Festivals (Eids)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।