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सहीह बुख़ारी

नंबर 937

नंबर 937किताब 11, नंबर 61
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ يُوسُفَ، قَالَ أَخْبَرَنَا مَالِكٌ، عَنْ نَافِعٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم كَانَ يُصَلِّي قَبْلَ الظُّهْرِ رَكْعَتَيْنِ، وَبَعْدَهَا رَكْعَتَيْنِ، وَبَعْدَ الْمَغْرِبِ رَكْعَتَيْنِ فِي بَيْتِهِ، وَبَعْدَ الْعِشَاءِ رَكْعَتَيْنِ وَكَانَ لاَ يُصَلِّي بَعْدَ الْجُمُعَةِ حَتَّى يَنْصَرِفَ فَيُصَلِّي رَكْعَتَيْنِ‏.‏
Narrated `Abdullah bin `Umar:Allah's Messenger (ﷺ) used to pray two rak`at before the Zuhr prayer and two rak`at after it. He also used to pray two rak`at after the Maghrib prayer in his house, and two rak`at after the `Isha' prayer. He never prayed after Jumua prayer till he departed (from the Mosque), and then he would pray two rak`at at home

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 11 · Friday Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।