حَدَّثَنَا مُحَمَّدٌ، قَالَ أَخْبَرَنَا مَخْلَدُ بْنُ يَزِيدَ، قَالَ أَخْبَرَنَا ابْنُ جُرَيْجٍ، قَالَ سَمِعْتُ نَافِعًا، يَقُولُ سَمِعْتُ ابْنَ عُمَرَ ـ رضى الله عنهما ـ يَقُولُ نَهَى النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم أَنْ يُقِيمَ الرَّجُلُ أَخَاهُ مِنْ مَقْعَدِهِ وَيَجْلِسَ فِيهِ. قُلْتُ لِنَافِعٍ الْجُمُعَةَ قَالَ الْجُمُعَةَ وَغَيْرَهَا.
Narrated Ibn Juraij:I heard Nafi' saying, "Ibn `Umar, said, 'The Prophet (ﷺ) forbade that a man should make another man to get up to sit in his place' ". I said to Nafi`, 'Is it for Jumua prayer only?' He replied, "For Jumua prayer and any other (prayer)
स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।