सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह बुख़ारी

नंबर 906

नंबर 906किताब 11, नंबर 30
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ أَبِي بَكْرٍ الْمُقَدَّمِيُّ، قَالَ حَدَّثَنَا حَرَمِيُّ بْنُ عُمَارَةَ، قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو خَلْدَةَ ـ هُوَ خَالِدُ بْنُ دِينَارٍ ـ قَالَ سَمِعْتُ أَنَسَ بْنَ مَالِكٍ، يَقُولُ كَانَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم إِذَا اشْتَدَّ الْبَرْدُ بَكَّرَ بِالصَّلاَةِ، وَإِذَا اشْتَدَّ الْحَرُّ أَبْرَدَ بِالصَّلاَةِ، يَعْنِي الْجُمُعَةَ‏.‏ قَالَ يُونُسُ بْنُ بُكَيْرٍ أَخْبَرَنَا أَبُو خَلْدَةَ فَقَالَ بِالصَّلاَةِ، وَلَمْ يَذْكُرِ الْجُمُعَةَ‏.‏ وَقَالَ بِشْرُ بْنُ ثَابِتٍ حَدَّثَنَا أَبُو خَلْدَةَ قَالَ صَلَّى بِنَا أَمِيرٌ الْجُمُعَةَ ثُمَّ قَالَ لأَنَسٍ ـ رضى الله عنه ـ كَيْفَ كَانَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم يُصَلِّي الظُّهْرَ
Narrated Anas bin Malik:The Prophet (ﷺ) used to offer the prayer earlier if it was very cold; and if it was very hot he used to delay the prayer, i.e. the Jumua prayer

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 11 · Friday Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।