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सहीह बुख़ारी

नंबर 868

नंबर 868किताब 10, नंबर 259
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مِسْكِينٍ، قَالَ حَدَّثَنَا بِشْرٌ، أَخْبَرَنَا الأَوْزَاعِيُّ، حَدَّثَنِي يَحْيَى بْنُ أَبِي كَثِيرٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي قَتَادَةَ الأَنْصَارِيِّ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ إِنِّي لأَقُومُ إِلَى الصَّلاَةِ وَأَنَا أُرِيدُ أَنْ أُطَوِّلَ فِيهَا، فَأَسْمَعُ بُكَاءَ الصَّبِيِّ، فَأَتَجَوَّزُ فِي صَلاَتِي كَرَاهِيَةَ أَنْ أَشُقَّ عَلَى أُمِّهِ ‏"‏‏.‏
Narrated `Abdullah bin Abi Qatada Al-Ansari:My father said, "Allah's Messenger (ﷺ) said, "Whenever I stand for prayer, I want to prolong it but on hearing the cries of a child, I would shorten it as I dislike to put its mother in trouble

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 10 · Call to Prayers (Adhaan)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।