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सहीह बुख़ारी

नंबर 865

नंबर 865किताब 10, नंबर 256
حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ مُوسَى، عَنْ حَنْظَلَةَ، عَنْ سَالِمِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ ـ رضى الله عنهما ـ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ إِذَا اسْتَأْذَنَكُمْ نِسَاؤُكُمْ بِاللَّيْلِ إِلَى الْمَسْجِدِ فَأْذَنُوا لَهُنَّ ‏"‏‏.‏ تَابَعَهُ شُعْبَةُ عَنِ الأَعْمَشِ عَنْ مُجَاهِدٍ عَنِ ابْنِ عُمَرَ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم‏.‏
Narrated Ibn `Umar:The Prophet (ﷺ) said, "If your women ask permission to go to the mosque at night, allow them

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 10 · Call to Prayers (Adhaan)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।