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सहीह बुख़ारी

नंबर 847

नंबर 847किताब 10, नंबर 239
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ، سَمِعَ يَزِيدَ، قَالَ أَخْبَرَنَا حُمَيْدٌ، عَنْ أَنَسٍ، قَالَ أَخَّرَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم الصَّلاَةَ ذَاتَ لَيْلَةٍ إِلَى شَطْرِ اللَّيْلِ ثُمَّ خَرَجَ عَلَيْنَا، فَلَمَّا صَلَّى أَقْبَلَ عَلَيْنَا بِوَجْهِهِ فَقَالَ ‏ "‏ إِنَّ النَّاسَ قَدْ صَلَّوْا وَرَقَدُوا، وَإِنَّكُمْ لَنْ تَزَالُوا فِي صَلاَةٍ مَا انْتَظَرْتُمُ الصَّلاَةَ ‏"‏‏.‏
Narrated Anas bin Malik:Once the Prophet (ﷺ) delayed the `Isha' prayer until midnight and then came to us. Having prayed he faced us and said, "The people had prayed and slept but you were in the prayer as long as you were waiting for it

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 10 · Call to Prayers (Adhaan)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।