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सहीह बुख़ारी

नंबर 794

नंबर 794किताब 10, नंबर 189
حَدَّثَنَا حَفْصُ بْنُ عُمَرَ، قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ مَنْصُورٍ، عَنْ أَبِي الضُّحَى، عَنْ مَسْرُوقٍ، عَنْ عَائِشَةَ ـ رضى الله عنها ـ قَالَتْ كَانَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ فِي رُكُوعِهِ وَسُجُودِهِ ‏ "‏ سُبْحَانَكَ اللَّهُمَّ رَبَّنَا وَبِحَمْدِكَ، اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِي ‏"‏‏.‏
Narrated `Aisha:The Prophet (ﷺ) used to say in his bowing and prostrations, "Subhanaka l-lahumma Rabbana wa bihamdika; Allahumma ghfir li.' (Exalted [from unbecoming attributes] Are you O Allah our Lord, and by Your praise [do I exalt You]. O Allah! Forgive me

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 10 · Call to Prayers (Adhaan)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।