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सहीह बुख़ारी

नंबर 784

नंबर 784किताब 10, नंबर 179
حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ الْوَاسِطِيُّ، قَالَ حَدَّثَنَا خَالِدٌ، عَنِ الْجُرَيْرِيِّ، عَنْ أَبِي الْعَلاَءِ، عَنْ مُطَرِّفٍ، عَنْ عِمْرَانَ بْنِ حُصَيْنٍ، قَالَ صَلَّى مَعَ عَلِيٍّ ـ رضى الله عنه ـ بِالْبَصْرَةِ فَقَالَ ذَكَّرَنَا هَذَا الرَّجُلُ صَلاَةً كُنَّا نُصَلِّيهَا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم‏.‏ فَذَكَرَ أَنَّهُ كَانَ يُكَبِّرُ كُلَّمَا رَفَعَ وَكُلَّمَا وَضَعَ‏.‏
Narrated `Imran bin Husain:I offered the prayer with `Ali in Basra and he made us remember the prayer which we used to pray with Allah's Messenger (ﷺ). `Ali said Takbir on each rising and bowing

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 10 · Call to Prayers (Adhaan)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।