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सहीह बुख़ारी

नंबर 781

नंबर 781किताब 10, नंबर 176
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ يُوسُفَ، أَخْبَرَنَا مَالِكٌ، عَنْ أَبِي الزِّنَادِ، عَنِ الأَعْرَجِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ ـ رضى الله عنه ـ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ إِذَا قَالَ أَحَدُكُمْ آمِينَ‏.‏ وَقَالَتِ الْمَلاَئِكَةُ فِي السَّمَاءِ آمِينَ‏.‏ فَوَافَقَتْ إِحْدَاهُمَا الأُخْرَى، غُفِرَ لَهُ مَا تَقَدَّمَ مِنْ ذَنْبِهِ ‏"‏‏.‏
Narrated Abu Huraira:Allah's Messenger (ﷺ) said, "If any one of you says, "Amin" and the angels in the heavens say "Amin" and the former coincides with the latter, all his past sins will be forgiven

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 10 · Call to Prayers (Adhaan)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।