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सहीह बुख़ारी

नंबर 779

नंबर 779किताब 10, नंबर 174
حَدَّثَنَا أَبُو نُعَيْمٍ، حَدَّثَنَا هِشَامٌ، عَنْ يَحْيَى بْنِ أَبِي كَثِيرٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي قَتَادَةَ، عَنْ أَبِيهِ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم كَانَ يُطَوِّلُ فِي الرَّكْعَةِ الأُولَى مِنْ صَلاَةِ الظُّهْرِ، وَيُقَصِّرُ فِي الثَّانِيَةِ، وَيَفْعَلُ ذَلِكَ فِي صَلاَةِ الصُّبْحِ‏.‏
Narrated `Abdullah bin Abi Qatada:My father said, "The Prophet (ﷺ) used to prolong the first rak`a of the Zuhr prayer and shorten the second one and used to do the same in the Fajr prayer

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 10 · Call to Prayers (Adhaan)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।