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सहीह बुख़ारी

नंबर 769

नंबर 769किताब 10, नंबर 163
حَدَّثَنَا خَلاَّدُ بْنُ يَحْيَى، قَالَ حَدَّثَنَا مِسْعَرٌ، قَالَ حَدَّثَنَا عَدِيُّ بْنُ ثَابِتٍ، سَمِعَ الْبَرَاءَ، رضى الله عنه قَالَ سَمِعْتُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم يَقْرَأُ ‏{‏وَالتِّينِ وَالزَّيْتُونِ‏}‏ فِي الْعِشَاءِ، وَمَا سَمِعْتُ أَحَدًا أَحْسَنَ صَوْتًا مِنْهُ أَوْ قِرَاءَةً‏.‏
Narrated Al-Bara:I heard the Prophet (ﷺ) reciting wa t-teeni wa z-zaitun" (95) in the `Isha' prayer, and I never heard a sweeter voice or a better way of recitation than that of the Prophet

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 10 · Call to Prayers (Adhaan)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।