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सहीह बुख़ारी

नंबर 766

नंबर 766किताब 10, नंबर 160
حَدَّثَنَا أَبُو النُّعْمَانِ، قَالَ حَدَّثَنَا مُعْتَمِرٌ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ بَكْرٍ، عَنْ أَبِي رَافِعٍ، قَالَ صَلَّيْتُ مَعَ أَبِي هُرَيْرَةَ الْعَتَمَةَ فَقَرَأَ ‏{‏إِذَا السَّمَاءُ انْشَقَّتْ‏}‏ فَسَجَدَ فَقُلْتُ لَهُ قَالَ سَجَدْتُ خَلْفَ أَبِي الْقَاسِمِ صلى الله عليه وسلم فَلاَ أَزَالُ أَسْجُدُ بِهَا حَتَّى أَلْقَاهُ‏.‏
Narrated Abu Rafi`:I offered the `Isha' prayer behind Abu Huraira and he recited, "Idha s-samaa'u n-shaqqat" (84) and prostrated. On my inquiring, he said, "I prostrated behind Abul-Qasim (the Prophet) (when he recited that Sura) and I will go on doing it till I meet him

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 10 · Call to Prayers (Adhaan)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।