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सहीह बुख़ारी

नंबर 763

नंबर 763किताब 10, नंबर 157
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ يُوسُفَ، قَالَ أَخْبَرَنَا مَالِكٌ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُتْبَةَ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ ـ رضى الله عنهما ـ أَنَّهُ قَالَ إِنَّ أُمَّ الْفَضْلِ سَمِعَتْهُ وَهُوَ يَقْرَأُ ‏{‏وَالْمُرْسَلاَتِ عُرْفًا‏}‏ فَقَالَتْ يَا بُنَىَّ وَاللَّهِ لَقَدْ ذَكَّرْتَنِي بِقِرَاءَتِكَ هَذِهِ السُّورَةَ، إِنَّهَا لآخِرُ مَا سَمِعْتُ مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقْرَأُ بِهَا فِي الْمَغْرِبِ‏.‏
Narrated Ibn `Abbas:(My mother) Umu-l-Fadl heard me reciting "Wal Mursalati `Urfan" (77) and said, "O my son! By Allah, your recitation made me remember that it was the last Sura I heard from Allah's Messenger (ﷺ). He recited it in the Maghrib prayer

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 10 · Call to Prayers (Adhaan)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।