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सहीह बुख़ारी

नंबर 747

नंबर 747किताब 10, नंबर 141
حَدَّثَنَا حَجَّاجٌ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، قَالَ أَنْبَأَنَا أَبُو إِسْحَاقَ، قَالَ سَمِعْتُ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ يَزِيدَ، يَخْطُبُ قَالَ حَدَّثَنَا الْبَرَاءُ، وَكَانَ، غَيْرَ كَذُوبٍ أَنَّهُمْ كَانُوا إِذَا صَلَّوْا مَعَ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فَرَفَعَ رَأْسَهُ مِنَ الرُّكُوعِ قَامُوا قِيَامًا حَتَّى يَرَوْنَهُ قَدْ سَجَدَ‏.‏
Narrated Al-Bara:(And Al-Bara was not a liar) Whenever we offered prayer with the Prophet (ﷺ) and he raised his head from the bowing, we used to remain standing till we saw him prostrating

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 10 · Call to Prayers (Adhaan)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।