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सहीह बुख़ारी

नंबर 734

नंबर 734किताब 10, नंबर 128
حَدَّثَنَا أَبُو الْيَمَانِ، قَالَ أَخْبَرَنَا شُعَيْبٌ، قَالَ حَدَّثَنِي أَبُو الزِّنَادِ، عَنِ الأَعْرَجِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ إِنَّمَا جُعِلَ الإِمَامُ لِيُؤْتَمَّ بِهِ، فَإِذَا كَبَّرَ فَكَبِّرُوا، وَإِذَا رَكَعَ فَارْكَعُوا، وَإِذَا قَالَ سَمِعَ اللَّهُ لِمَنْ حَمِدَهُ‏.‏ فَقُولُوا رَبَّنَا وَلَكَ الْحَمْدُ‏.‏ وَإِذَا سَجَدَ فَاسْجُدُوا، وَإِذَا صَلَّى جَالِسًا فَصَلُّوا جُلُوسًا أَجْمَعُونَ ‏"‏‏.‏
Narrated Abu Huraira:The Prophet (ﷺ) said, "The Imam is to be followed. Say the Takbir when he says it; bow if he bows; if he says 'Sami`a l-lahu liman hamidah', say, ' Rabbana wa laka l-hamd', prostrate if he prostrates and pray sitting altogether if he prays sitting

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 10 · Call to Prayers (Adhaan)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।