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सहीह बुख़ारी

नंबर 711

नंबर 711किताब 10, नंबर 106
حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ حَرْبٍ، وَأَبُو النُّعْمَانِ، قَالاَ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ، عَنْ أَيُّوبَ، عَنْ عَمْرِو بْنِ دِينَارٍ، عَنْ جَابِرٍ، قَالَ كَانَ مُعَاذٌ يُصَلِّي مَعَ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم ثُمَّ يَأْتِي قَوْمَهُ فَيُصَلِّي بِهِمْ‏.‏
Narrated Jabir bin `Abdullah:Mu`adh used to pray with the Prophet (ﷺ) and then go and lead his people (tribe) in the prayer

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 10 · Call to Prayers (Adhaan)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।