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सहीह बुख़ारी

नंबर 709

नंबर 709किताब 10, नंबर 104
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، قَالَ حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ زُرَيْعٍ، قَالَ حَدَّثَنَا سَعِيدٌ، قَالَ حَدَّثَنَا قَتَادَةُ، أَنَّ أَنَسَ بْنَ مَالِكٍ، حَدَّثَهُ أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ إِنِّي لأَدْخُلُ فِي الصَّلاَةِ وَأَنَا أُرِيدُ إِطَالَتَهَا، فَأَسْمَعُ بُكَاءَ الصَّبِيِّ، فَأَتَجَوَّزُ فِي صَلاَتِي مِمَّا أَعْلَمُ مِنْ شِدَّةِ وَجْدِ أُمِّهِ مِنْ بُكَائِهِ ‏"‏‏.‏
Narrated Anas bin Malik:The Prophet (ﷺ) said, "When I start the prayer I intend to prolong it, but on hearing the cries of a child, I cut short the prayer because I know that the cries of the child will incite its mother's passions

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 10 · Call to Prayers (Adhaan)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।