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सहीह बुख़ारी

नंबर 643

नंबर 643किताब 10, नंबर 40
حَدَّثَنَا عَيَّاشُ بْنُ الْوَلِيدِ، قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الأَعْلَى، قَالَ حَدَّثَنَا حُمَيْدٌ، قَالَ سَأَلْتُ ثَابِتًا الْبُنَانِيَّ عَنِ الرَّجُلِ، يَتَكَلَّمُ بَعْدَ مَا تُقَامُ الصَّلاَةُ فَحَدَّثَنِي عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، قَالَ أُقِيمَتِ الصَّلاَةُ فَعَرَضَ لِلنَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم رَجُلٌ فَحَبَسَهُ بَعْدَ مَا أُقِيمَتِ الصَّلاَةُ‏.‏
Narrated Anas bin Malik:Once Iqama was pronounced a man came to the Prophet (ﷺ) and detained him (from the prayer)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 10 · Call to Prayers (Adhaan)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।