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सहीह बुख़ारी

नंबर 630

नंबर 630किताब 10, नंबर 27
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يُوسُفَ، قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ خَالِدٍ الْحَذَّاءِ، عَنْ أَبِي قِلاَبَةَ، عَنْ مَالِكِ بْنِ الْحُوَيْرِثِ، قَالَ أَتَى رَجُلاَنِ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم يُرِيدَانِ السَّفَرَ فَقَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ إِذَا أَنْتُمَا خَرَجْتُمَا فَأَذِّنَا ثُمَّ أَقِيمَا ثُمَّ لِيَؤُمَّكُمَا أَكْبَرُكُمَا ‏"‏‏.‏
Narrated Malik bin Huwairith:Two men came to the Prophet (ﷺ) with the intention of a journey. The Prophet (ﷺ) said, "When (both of) you set out, pronounce Adhan and then Iqama and the oldest of you should lead the prayer

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 10 · Call to Prayers (Adhaan)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।