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सहीह बुख़ारी

नंबर 627

नंबर 627किताब 10, नंबर 24
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ يَزِيدَ، قَالَ حَدَّثَنَا كَهْمَسُ بْنُ الْحَسَنِ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ بُرَيْدَةَ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مُغَفَّلٍ، قَالَ قَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ بَيْنَ كُلِّ أَذَانَيْنِ صَلاَةٌ بَيْنَ كُلِّ أَذَانَيْنِ صَلاَةٌ ـ ثُمَّ قَالَ فِي الثَّالِثَةِ ـ لِمَنْ شَاءَ ‏"‏‏.‏
अब्दुल्लाह बिन मुग़फ्फ़ल रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है : "हर दो अज़ानों के बीच में नमाज़ है। हर दो अज़ानों के बीच में नमाज़ है।" फिर तीसरी बार फ़रमाया : "उसके लिए, जो पढ़ना चाहे।"

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 10 · Call to Prayers (Adhaan)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।