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सुनन अबू दाऊद

नंबर 1661

नंबर 1661किताब 9, नंबर 106
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ خَلَفٍ، حَدَّثَنَا أَبُو عَاصِمٍ، عَنِ ابْنِ جُرَيْجٍ، قَالَ قَالَ أَبُو الزُّبَيْرِ سَمِعْتُ عُبَيْدَ بْنَ عُمَيْرٍ، قَالَ قَالَ رَجُلٌ يَا رَسُولَ اللَّهِ مَا حَقُّ الإِبِلِ فَذَكَرَ نَحْوَهُ زَادَ ‏ "‏ وَإِعَارَةُ دَلْوِهَا ‏"‏ ‏.‏
The aforesaid tradition has also been transmitted by ‘Ubaid bin ‘ Umair through a different chain of narrators. This version goes:A man asked: Messenger of Allah (ﷺ), what is due on camels? He replied in a similar way. This version adds "and to lend its udders.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • Sahih Muslim (988)Zubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 9 · Zakat (Kitab Al-Zakat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।