حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا اللَّيْثُ بْنُ سَعْدٍ، عَنْ جَعْفَرِ بْنِ رَبِيعَةَ، عَنْ بَكْرِ بْنِ سَوَادَةَ، عَنْ مُسْلِمِ بْنِ مَخْشِيٍّ، عَنِ ابْنِ الْفِرَاسِيِّ، أَنَّ الْفِرَاسِيَّ، قَالَ لِرَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَسْأَلُ يَا رَسُولَ اللَّهِ فَقَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم " لاَ وَإِنْ كُنْتَ سَائِلاً لاَ بُدَّ فَاسْأَلِ الصَّالِحِينَ " .
Narrated Ibn al-Firasi: Al-Firasi asked the Messenger of Allah (ﷺ): May I beg, Messenger of Allah? The Prophet (ﷺ) said: No, but if there is no escape from it, beg from the upright
स्रोत में दर्ज दर्जे
DaifAl-Albani
DaifMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
DaifShuaib Al Arnaut
DaifZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।