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सुनन अबू दाऊद

नंबर 1566

नंबर 1566किताब 9, नंबर 11
حَدَّثَنَا صَفْوَانُ بْنُ صَالِحٍ، حَدَّثَنَا الْوَلِيدُ بْنُ مُسْلِمٍ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ عُمَرَ بْنِ يَعْلَى، فَذَكَرَ الْحَدِيثَ نَحْوَ حَدِيثِ الْخَاتَمِ ‏.‏ قِيلَ لِسُفْيَانَ كَيْفَ تُزَكِّيهِ قَالَ تَضُمُّهُ إِلَى غَيْرِهِ ‏.‏
The aforesaid tradition has also been narrated by ‘Umar bin Ya’la through a different chain of narrators, like the tradition of ring. Sufyan, a narrator, was asked How do you pay zakat on it. He said You may combine it with other (ornaments)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAl-Albani
  • DaifMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • DaifShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 9 · Zakat (Kitab Al-Zakat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।