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सुनन अबू दाऊद

नंबर 1564

नंबर 1564किताब 9, नंबर 9
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عِيسَى، حَدَّثَنَا عَتَّابٌ، - يَعْنِي ابْنَ بَشِيرٍ - عَنْ ثَابِتِ بْنِ عَجْلاَنَ، عَنْ عَطَاءٍ، عَنْ أُمِّ سَلَمَةَ، قَالَتْ كُنْتُ أَلْبَسُ أَوْضَاحًا مِنْ ذَهَبٍ فَقُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَكَنْزٌ هُوَ فَقَالَ ‏ "‏ مَا بَلَغَ أَنْ تُؤَدَّى زَكَاتُهُ فَزُكِّيَ فَلَيْسَ بِكَنْزٍ ‏"‏ ‏.‏
Narrated Umm Salamah, Ummul Mu'minin: I used to wear gold ornaments. I asked: Is that a treasure (kanz), Messenger of Allah? He replied: whatever reaches a quantity on which zakat is payable is not a treasure (kanz) when the zakat is paid
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • HasanAl-Albani
  • HasanMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • Hasan LighairihiShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 9 · Zakat (Kitab Al-Zakat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।