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सुनन अबू दाऊद

नंबर 1557

नंबर 1557किताब 9, नंबर 2
حَدَّثَنَا ابْنُ السَّرْحِ، وَسُلَيْمَانُ بْنُ دَاوُدَ، قَالاَ أَخْبَرَنَا ابْنُ وَهْبٍ، أَخْبَرَنِي يُونُسُ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، قَالَ قَالَ أَبُو بَكْرٍ إِنَّ حَقَّهُ أَدَاءُ الزَّكَاةِ وَقَالَ عِقَالاً ‏.‏
This tradition has also been transmitted by Al Zuhri through a different chain of narrators. This version has “Abu Bakr said its due is the payment of zakat.” He used the word “a rope of a Camel”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • ShadhAl-Albani
  • ShadhMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih Bukhari (7284، 7285) Sahih Muslim (20)Zubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 9 · Zakat (Kitab Al-Zakat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।