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सुनन अबू दाऊद

नंबर 1537

नंबर 1537किताब 8, नंबर 122
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، حَدَّثَنَا مُعَاذُ بْنُ هِشَامٍ، حَدَّثَنِي أَبِي، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ أَبِي بُرْدَةَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، أَنَّ أَبَاهُ، حَدَّثَهُ أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم كَانَ إِذَا خَافَ قَوْمًا قَالَ ‏ "‏ اللَّهُمَّ إِنَّا نَجْعَلُكَ فِي نُحُورِهِمْ وَنَعُوذُ بِكَ مِنْ شُرُورِهِمْ ‏"‏ ‏.‏
Narrated AbuMusa al-Ash'ari: When the Prophet (ﷺ) feared a (group of) people, he would say: "O Allah, we make Thee our shield against them, and take refuge in Thee from their evils
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 8 · Prayer (Kitab Al-Salat): Detailed Injunctions about Witr

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।