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सुनन अबू दाऊद

नंबर 1494

नंबर 1494किताब 8, नंबर 79
حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ خَالِدٍ الرَّقِّيُّ، حَدَّثَنَا زَيْدُ بْنُ حُبَابٍ، حَدَّثَنَا مَالِكُ بْنُ مِغْوَلٍ، بِهَذَا الْحَدِيثِ قَالَ فِيهِ ‏ "‏ لَقَدْ سَأَلْتَ اللَّهَ عَزَّ وَجَلَّ بِاسْمِهِ الأَعْظَمِ ‏"‏ ‏.‏
The aforesaid tradition has been transmitted through a different chain of narrators by Malik b. Mighwal. This verso adds:"He has asked Allah using His Greatest Name
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 8 · Prayer (Kitab Al-Salat): Detailed Injunctions about Witr

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।