حَدَّثَنَا ابْنُ السَّرْحِ، أَخْبَرَنَا ابْنُ وَهْبٍ، حَدَّثَنَا أَبُو صَخْرٍ، عَنِ ابْنِ قُسَيْطٍ، عَنْ خَارِجَةَ بْنِ زَيْدِ بْنِ ثَابِتٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم بِمَعْنَاهُ . قَالَ أَبُو دَاوُدَ كَانَ زَيْدٌ الإِمَامَ فَلَمْ يَسْجُدْ فِيهَا .
This tradition has also been transmitted by Zaid b. Thabit through a different chain of narrators to the same effect. Abu Dawud said:Zaid was imam (in a prayer) and he did not make prostration
स्रोत में दर्ज दर्जे
DaifAl-Albani
SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
Isnaad HasanZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।