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सुनन अबू दाऊद

नंबर 1305

नंबर 1305किताब 5, नंबर 56
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ مُحَمَّدٍ، - يَعْنِي الْمَرْوَزِيَّ - حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، عَنْ مِسْعَرٍ، عَنْ سِمَاكٍ الْحَنَفِيِّ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ لَمَّا نَزَلَتْ أَوَّلُ الْمُزَّمِّلِ كَانُوا يَقُومُونَ نَحْوًا مِنْ قِيَامِهِمْ فِي شَهْرِ رَمَضَانَ حَتَّى نَزَلَ آخِرُهَا وَكَانَ بَيْنَ أَوَّلِهَا وَآخِرِهَا سَنَةٌ ‏.‏
Narrated Ibn 'Abbas:When the opening verses of Surah Al-muzammil was revealed, the Companions would pray as long as they would pray during Ramadan until its last verses were revealed. The period between the revelation of its opening and the last verses was one year
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Prayer (Kitab Al-Salat): Voluntary Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।