अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अन्हु- से वर्णित है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "जब तुममें से कोई सुबह से पहले दो रकातें पढ़े, तो दाईं करवट पर लेट जाए।" यह सुन मरवान ने कहाः क्या हममें से किसी का मस्जिद चलकर जाना काफ़ी नहीं है कि उसे दाईं करवट पर लेटना भी होगा? उबैदुल्लाह अपनी हदीस में कहते हैं कि अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु तुममें - ने उत्तर दियाः नहीं! वर्णनकर्ता कहते हैं कि इसकी जानकारी अब्दुल्लाह बिन उमर -रज़ियल्लाहु अन्हुमा- को मिली, तो उन्होंने कहाः अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अन्हु- ने अपनी जान पर अधिक बोझ डाल लिया है। वर्णनकर्ता कहते हैं कि इब्ने उमर -रज़ियल्लाहु अन्हुमा- से पूछा गयाः क्या वह जो कुछ कहते हैं उसमें से आप किसी चीज़ का इनकार भी करते हैं? तो फ़रमायाः नहीं! लेकिन बात यह है कि उन्होंने होसला दिखाया और हम डरते रह गए। वर्णनकर्ता कहते हैं इसकी जानकारी अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अन्हु- को मिली, तो फ़रमायाः यदि मैंने याद रखा और वे भूल गए, तो इसमें मेरा क्या गुनाह है?
जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।