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सुनन अबू दाऊद

नंबर 1254

नंबर 1254किताब 5, नंबर 5
حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، حَدَّثَنَا يَحْيَى، عَنِ ابْنِ جُرَيْجٍ، حَدَّثَنِي عَطَاءٌ، عَنْ عُبَيْدِ بْنِ عُمَيْرٍ، عَنْ عَائِشَةَ، - رضى الله عنها - قَالَتْ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم لَمْ يَكُنْ عَلَى شَىْءٍ مِنَ النَّوَافِلِ أَشَدَّ مُعَاهَدَةً مِنْهُ عَلَى الرَّكْعَتَيْنِ قَبْلَ الصُّبْحِ ‏.‏
Narrated 'Aishah:The Messenger of Allah (ﷺ) was more particular about observing the supererogatory rak'ahs before the dawn prayer than about observing any of the other supererogatory prayers
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih Bukhari (1169) Sahih Muslim (724)Zubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Prayer (Kitab Al-Salat): Voluntary Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।