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सुनन अबू दाऊद

नंबर 1250

नंबर 1250किताब 5, नंबर 1
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عِيسَى، حَدَّثَنَا ابْنُ عُلَيَّةَ، حَدَّثَنَا دَاوُدُ بْنُ أَبِي هِنْدٍ، حَدَّثَنِي النُّعْمَانُ بْنُ سَالِمٍ، عَنْ عَمْرِو بْنِ أَوْسٍ، عَنْ عَنْبَسَةَ بْنِ أَبِي سُفْيَانَ، عَنْ أُمِّ حَبِيبَةَ، قَالَتْ قَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَنْ صَلَّى فِي يَوْمٍ ثِنْتَىْ عَشْرَةَ رَكْعَةً تَطَوُّعًا بُنِيَ لَهُ بِهِنَّ بَيْتٌ فِي الْجَنَّةِ ‏"‏ ‏.‏
Narrated Umm Habibah:The Prophet (ﷺ) as saying: If anyone prays in a day and a night twelve rak'ahs voluntarily (supererogatory prayer), a house will be built from him in Paradise on account of these (rak'ahs)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih Muslim (728)Zubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Prayer (Kitab Al-Salat): Voluntary Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।