حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، حَدَّثَنَا بِشْرٌ، - يَعْنِي ابْنَ الْمُفَضَّلِ - قَالَ حَدَّثَنِي بَشِيرُ بْنُ مَيْمُونٍ، عَنْ عَمِّهِ، أُسَامَةَ بْنِ أَخْدَرِيٍّ أَنَّ رَجُلاً، يُقَالُ لَهُ أَصْرَمُ كَانَ فِي النَّفَرِ الَّذِينَ أَتَوْا رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم " مَا اسْمُكَ " . قَالَ أَنَا أَصْرَمُ . قَالَ " بَلْ أَنْتَ زُرْعَةُ " .
Narrated Usamah ibn Akhdari: A man called Asram was among those who came to the Messenger of Allah (ﷺ). The Messenger of Allah (ﷺ) said: What is your name? He replied: Asram. He said: No, you are Zur'ah
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAl-Albani
SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
Isnaad HasanZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।