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सुनन अबू दाऊद

नंबर 4907

नंबर 4907किताब 43, नंबर 135
حَدَّثَنَا هَارُونُ بْنُ زَيْدِ بْنِ أَبِي الزَّرْقَاءِ، حَدَّثَنَا أَبِي، حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ سَعْدٍ، عَنْ أَبِي حَازِمٍ، وَزَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ، أَنَّ أُمَّ الدَّرْدَاءِ، قَالَتْ سَمِعْتُ أَبَا الدَّرْدَاءِ، قَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ لاَ يَكُونُ اللَّعَّانُونَ شُفَعَاءَ وَلاَ شُهَدَاءَ ‏"‏ ‏.‏
Abu al-Darda’ said :I heard the Messenger of Allah (May peace be upon him) say: Men given to cursing will not be witnesses or intercessors
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • Sahih Muslim (2598)Zubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 43 · General Behavior (Kitab Al-Adab)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।