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सुनन अबू दाऊद

नंबर 4812

नंबर 4812किताब 43, नंबर 40
حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ إِسْمَاعِيلَ، حَدَّثَنَا حَمَّادٌ، عَنْ ثَابِتٍ، عَنْ أَنَسٍ، أَنَّ الْمُهَاجِرِينَ، قَالُوا يَا رَسُولَ اللَّهِ ذَهَبَتِ الأَنْصَارُ بِالأَجْرِ كُلِّهِ ‏.‏ قَالَ ‏ "‏ لاَ مَا دَعَوْتُمُ اللَّهَ لَهُمْ وَأَثْنَيْتُمْ عَلَيْهِمْ ‏"‏ ‏.‏
Narrated Anas ibn Malik: The Immigrants (Muhajirun) said: Messenger of Allah! the Helpers (Ansar) got the entire reward. He said: no, so long as you pray to Allah for them and praise them
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 43 · General Behavior (Kitab Al-Adab)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।