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सुनन अबू दाऊद

नंबर 1235

नंबर 1235किताब 4, नंबर 38
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ حَنْبَلٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، أَخْبَرَنَا مَعْمَرٌ، عَنْ يَحْيَى بْنِ أَبِي كَثِيرٍ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ ثَوْبَانَ، عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، قَالَ أَقَامَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم بِتَبُوكَ عِشْرِينَ يَوْمًا يَقْصُرُ الصَّلاَةَ ‏.‏ قَالَ أَبُو دَاوُدَ غَيْرُ مَعْمَرٍ لاَ يُسْنِدُهُ ‏.‏
Narrated Jabir ibn Abdullah: The Messenger of Allah (ﷺ) stayed at Tabuk twenty days; he shortened the prayer (during his stay). Abu Dawud said: No one narrates this tradition with continuous chain except Ma'mar
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 4 · Prayer (Kitab Al-Salat): Detailed Rules of Law about the Prayer during Journey

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।