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सुनन अबू दाऊद

नंबर 1232

नंबर 1232किताब 4, नंबर 35
حَدَّثَنَا نَصْرُ بْنُ عَلِيٍّ، أَخْبَرَنِي أَبِي، حَدَّثَنَا شَرِيكٌ، عَنِ ابْنِ الأَصْبَهَانِيِّ، عَنْ عِكْرِمَةَ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَقَامَ بِمَكَّةَ سَبْعَ عَشْرَةَ يُصَلِّي رَكْعَتَيْنِ ‏.‏
Narrated Ibn 'Abbas:The Messenger of Allah (ﷺ) stayed in Mecca seventeen days and prayed two rak'ahs (at each time of prayer)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Daif MunkarAl-Albani
  • Daif MunkarMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • DaifShuaib Al Arnaut
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 4 · Prayer (Kitab Al-Salat): Detailed Rules of Law about the Prayer during Journey

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।