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सुनन अबू दाऊद

नंबर 1225

नंबर 1225किताब 4, नंबर 28
حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، حَدَّثَنَا رِبْعِيُّ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الْجَارُودِ، حَدَّثَنِي عَمْرُو بْنُ أَبِي الْحَجَّاجِ، حَدَّثَنِي الْجَارُودُ بْنُ أَبِي سَبْرَةَ، حَدَّثَنِي أَنَسُ بْنُ مَالِكٍ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم كَانَ إِذَا سَافَرَ فَأَرَادَ أَنْ يَتَطَوَّعَ اسْتَقْبَلَ بِنَاقَتِهِ الْقِبْلَةَ فَكَبَّرَ ثُمَّ صَلَّى حَيْثُ وَجَّهَهُ رِكَابُهُ ‏.‏
Narrated Anas ibn Malik: When the Messenger of Allah (ﷺ) was on a journey and wished to say voluntary prayer, he made his she-camel face the qiblah and uttered the takbir (Allah is most great), then prayed in whatever direction his mount made his face
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • HasanAl-Albani
  • HasanMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • HasanShuaib Al Arnaut
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 4 · Prayer (Kitab Al-Salat): Detailed Rules of Law about the Prayer during Journey

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।