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सुनन अबू दाऊद

नंबर 1215

नंबर 1215किताब 4, नंबर 18
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ صَالِحٍ، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ مُحَمَّدٍ الْجَارِيُّ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ مُحَمَّدٍ، عَنْ مَالِكٍ، عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ، عَنْ جَابِرٍ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم غَابَتْ لَهُ الشَّمْسُ بِمَكَّةَ فَجَمَعَ بَيْنَهُمَا بِسَرِفَ ‏.‏
Narrated Jabir ibn Abdullah: When the sun set at Mecca, the Messenger of Allah (ﷺ) combined the two prayers at Sarif
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAl-Albani
  • DaifMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • DaifShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 4 · Prayer (Kitab Al-Salat): Detailed Rules of Law about the Prayer during Journey

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।