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सुनन अबू दाऊद

नंबर 4335

नंबर 4335किताब 39, नंबर 45
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ الْجَرَّاحِ، عَنْ جَرِيرٍ، عَنْ مُغِيرَةَ، عَنْ إِبْرَاهِيمَ، قَالَ قَالَ عَبِيدَةُ السَّلْمَانِيُّ بِهَذَا الْخَبَرِ قَالَ فَذَكَرَ نَحْوَهُ فَقُلْتُ لَهُ أَتَرَى هَذَا مِنْهُمْ - يَعْنِي الْمُخْتَارَ - فَقَالَ عَبِيدَةُ أَمَا إِنَّهُ مِنَ الرُّءُوسِ ‏.‏
A similar tradition has also been transmitted by Ibrahim (al-Nakha’l) through a different chain if narrators. I (Ibrahim) said to ‘Ubaidat al-Salmant :Do you think that his one of them, that is al-Mukhtar (al-Thaqaff)? He said : He is from the leaders
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Daif MaqtuAl-Albani
  • Daif MaqtuMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • DaifShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 39 · Battles (Kitab Al-Malahim)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।