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सुनन अबू दाऊद

नंबर 4301

नंबर 4301किताब 39, नंबर 11
حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَهَّابِ بْنُ نَجْدَةَ، حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ، ح وَحَدَّثَنَا هَارُونُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، حَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ سَوَّارٍ، حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ، حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ سُلَيْمٍ، عَنْ يَحْيَى بْنِ جَابِرٍ الطَّائِيِّ، - قَالَ هَارُونُ فِي حَدِيثِهِ - عَنْ عَوْفِ بْنِ مَالِكٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ لَنْ يَجْمَعَ اللَّهُ عَلَى هَذِهِ الأُمَّةِ سَيْفَيْنِ سَيْفًا مِنْهَا وَسَيْفًا مِنْ عَدُوِّهَا ‏"‏ ‏.‏
Narrated Awf ibn Malik: The Prophet (ﷺ) said: Allah will not gather two swords upon this community: Its own sword and the sword of its enemy
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 39 · Battles (Kitab Al-Malahim)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।