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सुनन अबू दाऊद

नंबर 4276

नंबर 4276किताब 37, नंबर 37
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ يُونُسَ، حَدَّثَنَا أَبُو شِهَابٍ، عَنْ سُلَيْمَانَ التَّيْمِيِّ، عَنْ أَبِي مِجْلَزٍ، فِي قَوْلِهِ ‏{‏ وَمَنْ يَقْتُلْ مُؤْمِنًا مُتَعَمِّدًا فَجَزَاؤُهُ جَهَنَّمُ ‏}‏ قَالَ هِيَ جَزَاؤُهُ فَإِنْ شَاءَ اللَّهُ أَنْ يَتَجَاوَزَ عَنْهُ فَعَلَ ‏.‏
About the verse "If a man kills a believer intentionally" Abu Mijlaz said:This is his recompense. If Allah wishes to disregard him, He may do do
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Hasan MaqtuAl-Albani
  • Hasan MaqtuMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 37 · Trials and Fierce Battles (Kitab Al-Fitan Wa Al-Malahim)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।