सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन अबू दाऊद

नंबर 4269

नंबर 4269किताब 37, नंबर 30
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُتَوَكِّلِ الْعَسْقَلاَنِيُّ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، حَدَّثَنَا مَعْمَرٌ، عَنْ أَيُّوبَ، عَنِ الْحَسَنِ، بِإِسْنَادِهِ وَمَعْنَاهُ مُخْتَصَرًا ‏.‏ قَالَ أَبُو دَاوُدَ لِمُحَمَّدٍ - يَعْنِي ابْنَ الْمُتَوَكِّلِ - أَخٌ ضَعِيفٌ يُقَالُ لَهُ الْحُسَيْنُ ‏.‏
The tradition mentioned above has also been transmitted briefly by al-Hasan through a different chain of narrators to the same effect
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih Muslim (2888)Zubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 37 · Trials and Fierce Battles (Kitab Al-Fitan Wa Al-Malahim)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।