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सुनन अबू दाऊद

नंबर 4250

नंबर 4250किताब 37, नंबर 11
قَالَ أَبُو دَاوُدَ حُدِّثْتُ عَنِ ابْنِ وَهْبٍ، قَالَ حَدَّثَنَا جَرِيرُ بْنُ حَازِمٍ، عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ يُوشِكُ الْمُسْلِمُونَ أَنْ يُحَاصَرُوا إِلَى الْمَدِينَةِ حَتَّى يَكُونَ أَبْعَدُ مَسَالِحِهِمْ سَلاَحَ ‏"‏ ‏.‏
Abu Dawud said:Ibn 'Umar reported the Messenger of Allah (ﷺ) as saying: The Muslims will soon be besieged up to Medina, so that their most distant frontier outpost will be Salah
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 37 · Trials and Fierce Battles (Kitab Al-Fitan Wa Al-Malahim)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।